Registration Number
अजाक्स – संविधान एवं नियमावली

संविधान एवं नियमावली

मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स)

पंजीयन क्र.- 25828 कार्यक्षेत्र: सम्पूर्ण मध्यप्रदेश
📍
वर्तमान प्रांतीय कार्यालय पता: प्रांतीय कार्यालय अजाक्स भवन, सेकंड स्टॉप, पंचशील नगर, जयंती मैदान के पास, भोपाल 462003

संस्था का विवरण एवं मुख्य उद्देश्य

  • संस्था का नाम: म.प्र. अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स-AJJAKS).
  • संस्था का कार्यालय (मूल संवैधानिक): एफ-88/12 तुलसी नगर, भोपाल-462003 मध्यप्रदेश.
  • कार्यक्षेत्र: सम्पूर्ण मध्यप्रदेश होगा.

संस्था के उद्देश्य (संस्था के निम्नलिखित उद्देश्य होगें):

  • i. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (जिन्हें इसके बाद आरक्षित वर्ग कहा गया है) के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सेवा संबंधी-मामलों (यथा भर्ती, शिक्षावृत्ति, छात्रवृत्ति, स्टेशनरी, पुस्तकालय, कम्प्यूटर, छात्रावास प्रवेश आर्थिक दावे इत्यादि के संबंध में राज्य) केन्द्र सरकार के संस्थानों पर सम्पर्क स्थापित कर समस्याओं के निदान हेतु आवश्यक कार्यवाहियां करना.
  • ii. राज्य शासन, शासन के सार्वजनिक उपक्रमों, अर्द्ध शासकीय संस्थाओं तथा स्थानीय निकायों की सेवाओं में आरक्षण के निर्धारित प्रतिशत की पूर्ति की स्थिति पर निगरानी रखते हुए निर्धारित प्रतिशत हेतु संवैधानिक एवं अहिंसक कार्यवाही करना.
  • iii. आरक्षित वर्गो के सेवारत व्यक्तियों के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक उत्थान हेतु प्रयास करना.
  • iv. आरक्षित वर्गो के सामान्य समुदाय के लोगों (नौकरी पेशा लोगों के अलावा) के शैक्षणिक, सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक उत्थान हेतु आवश्यक प्रयास करना तथा प्रयोजन हेतु सभा, जुलूस, सेमिनार, प्रशिक्षण शिविर का आयोजन करना.
  • v. आरक्षित वर्गो एवं उनके नौकरी पेशा सदस्यों को शिक्षित एवं जागृत करना.
  • vi. आरक्षित वर्गो के बीच एकता, भाईचारा एवं परस्पर सहयोग की भावना पैदा करते हुए उसे सुदृढ़ करना।
  • vii. आरक्षित वर्गो के कल्याण हेतु बनाए गए विभिन्न कानूनों का क्रियान्वयन सुनिश्चित कराना एवं ऐसे कानून बनाये जाने के लिए जनमत जागृत करना जो कि आरक्षित वर्गो के सर्वांगीण विकास, कल्याण हेतु आवश्यक प्रतीत हों.
  • viii. भारतीय संविधान में आरक्षित वर्गो के लिए प्रावधानित आरक्षण की सुविधा सम्बंधी प्रावधान को स्थाई प्रावधान बनाने के लिए प्रजातांत्रिक एवं विधि सम्मत तरीकों से प्रयत्न करना.
  • ix. संस्था की सम्भाग, जिला तहसील विकास खण्ड, पंचायत एवं ग्राम स्तर पर शाखायें गठित करना.
  • x. उपरोक्त समस्त उद्देश्यों को प्राप्ति हेतु चन्दा एकत्रित करना, शासन से अनुदान, ऋण, सहायता प्राप्त करना एवं अन्य आवश्यक अनुषांगिक कार्यवाहियां करना।

5. संस्था का संगठनात्मक ढांचा

संस्था की निम्नानुसार शाखाएं स्थापित की जायेंगी:-

i. प्रदेश स्तर पर
ii. संभाग स्तर पर
iii. जिला स्तर पर
iv. तहसील स्तर पर
v. विकास खण्ड स्तर पर
vi. पंचायत स्तर पर
vii. ग्राम स्तर पर

प्रत्येक स्तर पर राज्य प्रबंधकारिणी समिति के समान एक प्रबंधकारिणी समिति का गठन किया जावेगा। संस्था की संभाग, जिला तहसील विकास खण्ड पंचायत एवं ग्राम स्तर की शाखाओं पर राज्य स्तरीय प्रबन्धकारिणी का सम्पूर्ण नियंत्रण होगा। जिला स्तर की शाखायें संभाग के तथा तहसील पंचायत ग्राम विकास खण्ड पंचायत एवं ग्राम स्तर की शाखायें जिला शाखा के एवं ग्राम स्तर की शाखायें विकासखंड के नियंत्रण एवं मार्गदर्शन में कार्य करेंगी। संस्था की प्रबंधकारिणी समिति अपनी बैठक में बहुमत से प्रस्ताव पारित करके जिला शाखाओं के स्वरूप के संबंध में आवश्यक परिर्वतन कर सकेंगी.

सदस्यता श्रेणियां एवं योग्यताएं

6. सदस्यता श्रेणियां:

(अ) संरक्षक सदस्य

संस्था को जो व्यक्ति दान के रूप में रू.10000/- दस हजार या अधिक एकमुश्त या एक साल में बारह किश्तों में देगा वह संस्था का संरक्षक सदस्य होगा.

(ब) आजीवन सदस्य

जो व्यक्ति संस्था को दान के रूप में रू.5000/- पांच हजार या अधिक एकमुश्त देगा वह संस्था का आजीवन सदस्य होगा.

(स) साधारण सदस्य शुल्क संरचना (प्रतिवर्ष देय राशि):
श्रेणी क्रमांक अधिकारी / कर्मचारी वर्ग वार्षिक शुल्क राशि
(क)राजपत्रित अधिकारी प्रथम श्रेणी अधिकारीरू. 1000
(ख)राजपत्रित अधिकारी द्वितीय श्रेणी अधिकारीरू. 500
(स)तृतीय श्रेणी अधिकारी/कर्मचारीरू. 200
(घ)चतुर्थ श्रेणीरू. 100
(ड)आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ता कर्मचारी एवं कोटवाररू. 50

उपरोक्त सदस्यता शुल्क प्रतिवर्ष 1 जनवरी को देय होगा। जो साधारण सदस्य बिना संतोषजनक कारणों के 6 माह तक देय सदस्यता शुल्क नहीं देगा, उसकी सदस्यता समाप्त हो जायेगी। ऐसे सदस्य द्वारा संस्था के लिये नया आवेदन पत्र देने तथा बकाया सदस्यता शुल्क की राशि देने पर उसे पुनः सदस्य बनाया जा सकेगा.

(द) सम्मानीय सदस्य:

संस्था की प्रबंधकारिणी किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को उस समय के लिए जो भी वह उचित समझे सम्मानीय सदस्य बना सकती है। ऐसे सदस्य संस्था की साधारण सभा की बैठक में भाग ले सकते है, परंतु उन्हें मत देने का अधिकार नहीं होगा.

सदस्यता की प्राप्ति एवं योग्यताएं:

  • प्रत्येक व्यक्ति को, जो कि संस्था सदस्य बनने का इच्छुक हो, लिखित रूप में आवेदन करना होगा। ऐसा आवेदन पत्र प्रबंधकारिणी समिति को प्रस्तुत होगा जिसे आवेदन पत्र को स्वीकार या अस्वीकार करने का पूर्ण अधिकार होगा.
  • आयु सीमा: उसकी आयु 18 वर्ष से कम न हो.
  • नागरिकता: वह भारतीय नागरिक हो.
  • प्रतिज्ञा: उसने समिति के नियमों के पालन की प्रतिज्ञा की हो।
  • चरित्र एवं सेवा: वह सद्चरित्र हो तथा मद्यपान न करता हो एवं वह राज्य शासन का अथवा किसी शासकीय नियंत्रणाधीन सार्वजानिक उपक्रम का अथवा अर्द्ध शासकीय संस्था का अथवा किसी स्थानीय निकाय का अथवा किसी सहकारी संस्था या सहकारी बैंक भोगी अधिकारी या कर्मचारी हो अथवा ऐसा कोटवार हो जो अनुसूचित जाति या जनजाति का सदस्य हो अथवा ऊपर कंडिका (2) में वर्णित ऐसा कोई अधिकारी/ कर्मचारी जो सेवानिवृत्ति हो चुका हो, या निलंबन अधीन हो या अनियमित तरीके से सेवा पृथक कर दिया गया हो.

सदस्यता की समाप्ति:

संस्था की सदस्यता निम्नलिखित स्थिति में समाप्त हो जाएगी:-

  • मुत्यु हो जाने पर.
  • पागल हो जाने पर.
  • संस्था को देय चंदे की रकम नियम-6 में बताये अनुसार जमा न करने पर.
  • त्याग पत्र देने एवं उसके स्वीकार हो जाने पर.
  • चारित्रिक दोष होने पर और, कार्यकारिणी समिति के निर्णय अनुसार संस्था से निकाल दिये जाने पर (जिसके निर्णय पारित होने की सूचना सदस्य को लिखित में देना होगी).

12. सभाएं (साधारण, प्रबंधकारिणी एवं विशेष)

(अ) साधारण सभा

साधारण सभा में नियम 6 में दर्शाए श्रेणी के सदस्य समावेशित होंगे। साधारण सभा की बैठक आवश्यकतानुार होगी, पंरतु वर्ष में बैठक एक बार अनिर्वाय होगी। बैठक की माह, तारीख तथा बैठक का स्थान व समय कार्यकारिणी समिति निश्चित करेगी, जिसकी सूचना 15 दिवस पूर्व प्रत्येक सदस्य को दी जावेगी। बैठक का कोरम 3/5 सदस्यों का होगा। संस्था को प्रथम आम सभा पंजीयन दिनांक से तीन माह के भीतर बुलाई जाएगी। उसमें संस्थाओं के पदाधिकारियों का विधिवत निर्वाचन किया जावेगा। यदि संबंधित आम सभा का आयोजन किसी समय नहीं किया जाता तो पंजीयक को अधिकार होगा कि वह संस्था की आमसभा का आयोजन किसी जिम्मेदार कर्मचारी के मार्गदर्शन में करा लें जिसमें पदाधिकारियों का विधिवत चुनाव कराया जावेगा। यदि सभा का कोरम पूर्ण नहीं होता तो सभा स्थगित कर इसी स्थान पर पुन: की जावेगी, जिसके लिए कोरम की आवश्यकता नहीं होगी.

(ब) प्रबंधकारिणी सभा

प्रबंधकारिणी सभा की बैठक प्रत्येक 3 माह में होगी तथा बैठक का एजेण्डा तथा सूचना बैठक दिनांक से सात दिन पूर्व कार्यकारिणी के प्रत्येक सदस्य को भेजी जानी आवश्यक होगी। बैठक का कोरम 1/2 सदस्यों का होगा। यदि बैठक का कोरम पूर्ण नहीं होता है, तो बैठक एक घण्टे के लिए स्थागित कर उसी स्थान पर पुनः की जावेगी,जिसके लिए कोरम की कोई शर्त नही होगी.

(स) विशेष सभा

यदि कम से कम कुल संख्या (कुल सदस्यों की संख्या) के 2/3 सदस्यों द्वारा लिखित रूप से बैठक बुलाने हेतु आवेदन करे, तो उनके दर्शाये विषय पर विचार करने के लिए साधारण सभा की बैठक बुलाई जावेगी। विशेष संकल्प पारित होने पर संकल्प की प्रति, पंजीयक को संकल्प पारित हो जाने के दिनांक से 14 दिन के भीतर भेजी जावेगी। पंजीयक को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करने तथा समिति को परामर्श देने का अधिकार होगा.

साधारण सभा के अधिकार एवं कर्तव्य:

  • (क) संस्था के पिछले वर्ष का वार्षिक विवरण, प्रगति प्रतिवेदन स्वीकृत करना।
  • (ख) समाज की सामाजिक, शेक्षणिक आर्थिक, राजनेतिक स्थिति पर विचार करना.
  • (ग) समाज के विकास हेतु कार्यक्रम प्रस्तुत करना.
  • (घ) संस्था की स्थाई निधि व संपत्ति की ठीक व्यवस्था करना।
  • (ड) आगामी वर्ष के लिए लेखा परीक्षकों की नियुक्ति करना।
  • (छ) अन्य ऐसे विषयों पर विचार करना जो प्रबंधकारिणी द्वारा प्रस्तुत हों।
  • (ज) संस्था द्वारा संचालित संस्थाओं के आय व्यय पत्रकों को स्वीकृत करना।

प्रबंधकारिणी का गठन एवं पदाधिकारियों के अधिकार

प्रबंध समिति का कार्यकाल: समस्त स्तरीय प्रबंध समिति का कार्यकाल 3 वर्ष होगा। यथेष्ट कारण होने पर उस समय तक कार्य करती रहेगी जब तक नई समिति का निर्माण न हो जाए (अधिकतम 6 माह विस्तार, साधारण सभा का अनुमोदन अनिवार्य).

(क) राज्य की प्रबंधकारिणी का गठन (संशोधित स्वरूप):

स.क्र. पद का नाम निर्धारित संख्या (अधिकतम)
1अध्यक्ष01
2उपाध्यक्ष02
3महासचिव08
4सचिव08
5संयुक्त सचिव08
6कोषाध्यक्ष01
7आडिटर01
8प्रवक्ता01
9सदस्य (प्रत्येक जिले से एक)52

(ख) संभागीय एवं जिला/तहसील कार्यकारिणी ढांचा:

  • संभागीय कार्यकारिणी: नियुक्तियां प्रांताध्यक्ष/प्रांतीय प्रबंध कार्यकारिणी द्वारा की जावेगी या निर्वाचन से तय होगी। संभाग स्तर की संख्या जिला स्तरीय कार्यकारिणी संख्या के बराबर होगी.
  • जिला स्तरीय कार्यकारिणी संख्या: अध्यक्ष-01, उपाध्यक्ष-2, महासचिव-08, सचिव-08, संयुक्त सचिव-08, कोषाध्यक्ष-01, आडिटर-01, प्रवक्ता-01, सदस्य-48.
  • तहसील /विकासखण्ड स्तरीय कार्यकारिणी संख्या: अध्यक्ष-01, उपाध्यक्ष-2, महासचिव-08, सचिव-08, संयुक्त सचिव-08, कोषाध्यक्ष-01, आडिटर-01, प्रवक्ता-01, सदस्य-48.
  • विभागीय समितियां एवं प्रकोष्ठ: प्रांतीय, संभाग और जिला स्तर पर सफाई नगरीय कर्मचारी, चिकित्सा, अभियंता, राजस्व, महिला, वाणिज्यिक कर आदि प्रकोष्ठों का गठन प्रांताध्यक्ष की अनुमति से मनोनयन/पर्यवेक्षक द्वारा निर्वाचन से होगा.

पदाधिकारियों के विशिष्ट अधिकार एवं कर्तव्य:

  • अध्यक्ष: समस्त बैठकों की अध्यक्षता करना; विचारार्थ विषयों में निर्णायक मत देना; पदाधिकारियों के बीच कार्य एवं क्षेत्र का विभाजन करना.
  • उपाध्यक्ष: अध्यक्ष की अनुपस्थिति में बैठकों की अध्यक्षता व अधिकृत मामलों में अध्यक्ष के अधिकारों का उपयोग करना.
  • महासचिव: प्रांतीय अध्यक्ष के निर्देशानुसार बैठकें बुलाना, आवेदन/सुझाव प्रस्तुत करना, आय-व्यय लेखा तैयार कर प्रस्तुत करना। महासचिव को एक समय में रू. 20,000/- तक व्यय करने का अधिकार होगा.
  • सचिव व संयुक्त सचिव: अध्यक्ष द्वारा सौंपे गए महासचिव के कर्तव्यों व अन्य उत्तरदायित्वों का निर्वाह करना.
  • कोषाध्यक्ष: संस्था की धनराशि का पूर्ण हिसाब रखना तथा अध्यक्ष, महासचिव या कार्यकारिणी द्वारा स्वीकृत व्यय करना। दैनिक व्यय हेतु पास में अधिकतम रू. 5000/- रख सकते हैं.
  • आडिटर: संस्था के आय-व्यय का ऑडिट करना.

वित्तीय नियम, संपत्ति एवं वैधानिक व्यवस्थाएं

10. सदस्यता शुल्क का वितरण (संशोधित नियम):

जिला शाखा से प्राप्त सदस्यता शुल्क की पूर्ण राशि 100 प्रतिशत प्रांतीय कार्यालय में जमा रहेगी। प्रांतीय कार्यालय द्वारा उपर्युक्त राशि में से यथासंभव आवश्यकतानुसार राशि जिला निर्वाचन अधिकारी (अजाक्स) को निर्वाचन एवं उससे जुड़े अन्य खर्चो की पूर्ति हेतु प्रदाय की जाएगी। प्रांतीय कार्यालय के द्वारा उपर्युक्तनुसार शेष बची राशि का 40 प्रतिशत जिला शाखा के कार्यालयों की पूर्ति हेतु उनके बैंक खाते में निर्वाचन/ मनोनीत जिलाध्यक्ष को प्रदाय की जाएगी, जिसमें से 10 प्रतिशत तहसील एवं ब्लाक को उपलब्ध कराई जाएगी, 10 प्रतिशत संभाग को दी जावेगी एवं शेष 50 प्रतिशत प्रदेश में जमा रहेगी. जिला शाखा उपरोक्तनुसार प्रादेशिक कार्यालय से प्राप्त राशि में से आवश्यकतानुसार राशि तहसील स्तरीय शाखाओं को संचालन व उनके कार्यकलाप हेतु प्रदान करेगी।

कार्यालय अभिलेख (पंजी व्यवस्था):

संस्था कार्यालय में सदस्य पंजी रखी जायेगी तथा उसमें निम्न ब्यौरे दर्ज किये जायेगें:

  • प्रत्येक सदस्य का नाम, पता तथा विभाग का नाम.
  • वह तारीख जिसको सदस्यों को प्रवेश दिया गया तथा रसीद नंबर.
  • वह तारीख जिससे सदस्यता समाप्त हुई हो.

बैंक खाता संचालन एवं वित्तीय सीमाएं:

  • संस्था की समस्त निधि किसी राष्ट्रीयकृत बैंक, सहकारी बैंक या पोस्ट ऑफिस में सुरक्षित रखी जाएगी.
  • धन का आहरण (Withdrawal) अध्यक्ष या मंत्री तथा कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षरों से ही संभव होगा.

पंजीयक को भेजी जाने वाली जानकारियां व अधिकार:

  • धारा 27 व 28: वार्षिक सभा होने के 14 दिन के भीतर कार्यकारिणी समिति की सूची फाइल की जाएगी एवं परीक्षित लेखा भेजा जाएगा.
  • संशोधन (धारा 26): विधान में संशोधन साधारण सभा में उपस्थित सदस्यों के 2/3 मतों से पारित होगा। पंजीयक को भी संस्था हित में संशोधन का अधिकार होगा.
  • विघटन (धारा 27): संस्था का विघटन साधारण सभा के कुल सदस्यों के 3/5 मत से ही किया जा सकेगा.
  • सम्पत्ति नियम (धारा 28): संस्था की चल/अचल सम्पत्ति संस्था के नाम रहेगी। अचल सम्पत्ति रजिस्ट्रार फर्म्स सोसायटीज की लिखित अनुज्ञा के बिना दान, विक्रय या अंतरित नहीं की जा सकेगी.
  • विवाद (धारा 30): विवाद की स्थिति में अध्यक्ष साधारण सभा की अनुमति से सुलझाएंगे। असंतोष होने पर मामला रजिस्ट्रार को भेजा जाएगा, जिनका निर्णय अंतिम एवं सर्वमान्य होगा.

आचरण संहिता एवं आदर्श चुनाव आचार संहिता

अजाक्स आचरण संहिता (बिन्दु क्रमांक 07):

प्रत्येक सदस्य को अनुशासित रहते हुए संघ का कार्य करना है जिससे बाहरी वातावरण में संगठन की छवि धूमिल न हो बल्कि अपनी समस्याओं को शांति व भाईचारा में रहकर अनुशासित ढ़ंग से प्रस्तुत करनी है। संघ के विरूद्ध सदस्यों द्वारा अनुशासनात्मक तरीके से पेश न आने पर प्राथमिक सदस्यता से निष्काषित करने का अधिकार प्रांताध्यक्ष को होगा.

धारा-32: आदर्श चुनाव आचार संहिता

जिला, तहसील व ब्लाक स्तरीय निवार्चन प्रक्रियाओं के अतिरिक्त विभिन्न विभागीय शाखाओं व विभिन्न प्रकोष्ठ के निवार्चन प्रक्रियाओं को स्वस्थ एवं पारदर्शी बनाये रखने के लिए निम्नानुसार आदर्श आचार संहिता स्थायी रूप से लागू की जाती है:-

  • अध्यक्षों व अन्य पदों पर अभ्यर्थियों के निवार्चन प्रक्रिया में भाग लेने हेतु संघ की प्राथमिक सदस्यता अनिवार्य होगी।
  • अन्य मान्यता प्राप्त संघों को इस निवार्चन प्रक्रिया में भाग लेने की पात्रता नहीं होगी।
  • प्रांतीय कार्यालय को प्राप्त सदस्यता सूची का अनुमोदन प्रांतीय अध्यक्ष अथवा उनके निर्देशानुसार महासचिव करेंगे। समस्याओं के निराकरण हेतु 05 सदस्यीय समिति गठित होगी, जो अंतिम प्रतिवेदन प्रांताध्यक्ष को देगी.
  • मतपेटी व्यवस्था: मतदान स्थल पर प्रति 500 सदस्यों पर 1 मतपेटी रखी जावेगी। महिलाओं के लिए पृथक से मतपेटी होगी।
  • निवार्चन वर्ष में अभ्यर्थी आवेदन प्रस्तुत करने वाले सदस्य का संबंधित जिले की मतदाता सूची में नाम होना अनिवार्य है।
05. मतदाता सूची प्रारूप तालिका:
स. क्र. जारी रसीद क्रमांक सदस्यता क्रमांक नाम पिता का नाम पद पुरुष/महिला कार्यरत विभाग/कार्यालय नाम व पता
12345678

नोट: इसके अतिरिक्त सी.डी. (CD) में भी मतदाता सूची प्रांतीय कार्यालय को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।

निर्वाचन नामांकन शुल्क तालिका (पदवार राशि):
क्रमांक पद का नाम पद संख्या शुल्क राशि (रू.)
1अध्यक्ष (जिला, तहसील व ब्लाक)11000
2उपाध्यक्ष2500
3महासचिव8500
4सचिव8500
5संयुक्त सचिव8500
6कोषाध्यक्ष1 Gemini is AI and can make mistakes. अजाक्स – संविधान एवं नियमावली

संविधान एवं नियमावली

मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स)

पंजीयन क्र.- 25828 कार्यक्षेत्र: सम्पूर्ण मध्यप्रदेश
📍
वर्तमान प्रांतीय कार्यालय पता: प्रांतीय कार्यालय अजाक्स भवन, सेकंड स्टॉप, पंचशील नगर, जयंती मैदान के पास, भोपाल 462003

संस्था का विवरण एवं मुख्य उद्देश्य

  • संस्था का नाम: म.प्र. अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स-AJJAKS).
  • संस्था का कार्यालय (मूल संवैधानिक): एफ-88/12 तुलसी नगर, भोपाल-462003 मध्यप्रदेश.
  • कार्यक्षेत्र: सम्पूर्ण मध्यप्रदेश होगा.

संस्था के उद्देश्य (संस्था के निम्नलिखित उद्देश्य होगें):

  • i. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (जिन्हें इसके बाद आरक्षित वर्ग कहा गया है) के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सेवा संबंधी-मामलों (यथा भर्ती, शिक्षावृत्ति, छात्रवृत्ति, स्टेशनरी, पुस्तकालय, कम्प्यूटर, छात्रावास प्रवेश आर्थिक दावे इत्यादि के संबंध में राज्य) केन्द्र सरकार के संस्थानों पर सम्पर्क स्थापित कर समस्याओं के निदान हेतु आवश्यक कार्यवाहियां करना.
  • ii. राज्य शासन, शासन के सार्वजनिक उपक्रमों, अर्द्ध शासकीय संस्थाओं तथा स्थानीय निकायों की सेवाओं में आरक्षण के निर्धारित प्रतिशत की पूर्ति की स्थिति पर निगरानी रखते हुए निर्धारित प्रतिशत हेतु संवैधानिक एवं अहिंसक कार्यवाही करना.
  • iii. आरक्षित वर्गो के सेवारत व्यक्तियों के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक उत्थान हेतु प्रयास करना.
  • iv. आरक्षित वर्गो के सामान्य समुदाय के लोगों (नौकरी पेशा लोगों के अलावा) के शैक्षणिक, सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक उत्थान हेतु आवश्यक प्रयास करना तथा प्रयोजन हेतु सभा, जुलूस, सेमिनार, प्रशिक्षण शिविर का आयोजन करना.
  • v. आरक्षित वर्गो एवं उनके नौकरी पेशा सदस्यों को शिक्षित एवं जागृत करना.
  • vi. आरक्षित वर्गो के बीच एकता, भाईचारा एवं परस्पर सहयोग की भावना पैदा करते हुए उसे सुदृढ़ करना।
  • vii. आरक्षित वर्गो के कल्याण हेतु बनाए गए विभिन्न कानूनों का क्रियान्वयन सुनिश्चित कराना एवं ऐसे कानून बनाये जाने के लिए जनमत जागृत करना जो कि आरक्षित वर्गो के सर्वांगीण विकास, कल्याण हेतु आवश्यक प्रतीत हों.
  • viii. भारतीय संविधान में आरक्षित वर्गो के लिए प्रावधानित आरक्षण की सुविधा सम्बंधी प्रावधान को स्थाई प्रावधान बनाने के लिए प्रजातांत्रिक एवं विधि सम्मत तरीकों से प्रयत्न करना.
  • ix. संस्था की सम्भाग, जिला तहसील विकास खण्ड, पंचायत एवं ग्राम स्तर पर शाखायें गठित करना.
  • x. उपरोक्त समस्त उद्देश्यों को प्राप्ति हेतु चन्दा एकत्रित करना, शासन से अनुदान, ऋण, सहायता प्राप्त करना एवं अन्य आवश्यक अनुषांगिक कार्यवाहियां करना।

5. संस्था का संगठनात्मक ढांचा

संस्था की निम्नानुसार शाखाएं स्थापित की जायेंगी:-

i. प्रदेश स्तर पर
ii. संभाग स्तर पर
iii. जिला स्तर पर
iv. तहसील स्तर पर
v. विकास खण्ड स्तर पर
vi. पंचायत स्तर पर
vii. ग्राम स्तर पर

प्रत्येक स्तर पर राज्य प्रबंधकारिणी समिति के समान एक प्रबंधकारिणी समिति का गठन किया जावेगा। संस्था की संभाग, जिला तहसील विकास खण्ड पंचायत एवं ग्राम स्तर की शाखाओं पर राज्य स्तरीय प्रबन्धकारिणी का सम्पूर्ण नियंत्रण होगा। जिला स्तर की शाखायें संभाग के तथा तहसील पंचायत ग्राम विकास खण्ड पंचायत एवं ग्राम स्तर की शाखायें जिला शाखा के एवं ग्राम स्तर की शाखायें विकासखंड के नियंत्रण एवं मार्गदर्शन में कार्य करेंगी। संस्था की प्रबंधकारिणी समिति अपनी बैठक में बहुमत से प्रस्ताव पारित करके जिला शाखाओं के स्वरूप के संबंध में आवश्यक परिर्वतन कर सकेंगी.

सदस्यता श्रेणियां एवं योग्यताएं

6. सदस्यता श्रेणियां:

(अ) संरक्षक सदस्य

संस्था को जो व्यक्ति दान के रूप में रू.10000/- दस हजार या अधिक एकमुश्त या एक साल में बारह किश्तों में देगा वह संस्था का संरक्षक सदस्य होगा.

(ब) आजीवन सदस्य

जो व्यक्ति संस्था को दान के रूप में रू.5000/- पांच हजार या अधिक एकमुश्त देगा वह संस्था का आजीवन सदस्य होगा.

(स) साधारण सदस्य शुल्क संरचना (प्रतिवर्ष देय राशि):
श्रेणी क्रमांक अधिकारी / कर्मचारी वर्ग वार्षिक शुल्क राशि
(क)राजपत्रित अधिकारी प्रथम श्रेणी अधिकारीरू. 1000
(ख)राजपत्रित अधिकारी द्वितीय श्रेणी अधिकारीरू. 500
(स)तृतीय श्रेणी अधिकारी/कर्मचारीरू. 200
(घ)चतुर्थ श्रेणीरू. 100
(ड)आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ता कर्मचारी एवं कोटवाररू. 50

उपरोक्त सदस्यता शुल्क प्रतिवर्ष 1 जनवरी को देय होगा। जो साधारण सदस्य बिना संतोषजनक कारणों के 6 माह तक देय सदस्यता शुल्क नहीं देगा, उसकी सदस्यता समाप्त हो जायेगी। ऐसे सदस्य द्वारा संस्था के लिये नया आवेदन पत्र देने तथा बकाया सदस्यता शुल्क की राशि देने पर उसे पुनः सदस्य बनाया जा सकेगा.

(द) सम्मानीय सदस्य:

संस्था की प्रबंधकारिणी किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को उस समय के लिए जो भी वह उचित समझे सम्मानीय सदस्य बना सकती है। ऐसे सदस्य संस्था की साधारण सभा की बैठक में भाग ले सकते है, परंतु उन्हें मत देने का अधिकार नहीं होगा.

सदस्यता की प्राप्ति एवं योग्यताएं:

  • प्रत्येक व्यक्ति को, जो कि संस्था सदस्य बनने का इच्छुक हो, लिखित रूप में आवेदन करना होगा। ऐसा आवेदन पत्र प्रबंधकारिणी समिति को प्रस्तुत होगा जिसे आवेदन पत्र को स्वीकार या अस्वीकार करने का पूर्ण अधिकार होगा.
  • आयु सीमा: उसकी आयु 18 वर्ष से कम न हो.
  • नागरिकता: वह भारतीय नागरिक हो.
  • प्रतिज्ञा: उसने समिति के नियमों के पालन की प्रतिज्ञा की हो।
  • चरित्र एवं सेवा: वह सद्चरित्र हो तथा मद्यपान न करता हो एवं वह राज्य शासन का अथवा किसी शासकीय नियंत्रणाधीन सार्वजानिक उपक्रम का अथवा अर्द्ध शासकीय संस्था का अथवा किसी स्थानीय निकाय का अथवा किसी सहकारी संस्था या सहकारी बैंक भोगी अधिकारी या कर्मचारी हो अथवा ऐसा कोटवार हो जो अनुसूचित जाति या जनजाति का सदस्य हो अथवा ऊपर कंडिका (2) में वर्णित ऐसा कोई अधिकारी/ कर्मचारी जो सेवानिवृत्ति हो चुका हो, या निलंबन अधीन हो या अनियमित तरीके से सेवा पृथक कर दिया गया हो.

सदस्यता की समाप्ति:

संस्था की सदस्यता निम्नलिखित स्थिति में समाप्त हो जाएगी:-

  • मुत्यु हो जाने पर.
  • पागल हो जाने पर.
  • संस्था को देय चंदे की रकम नियम-6 में बताये अनुसार जमा न करने पर.
  • त्याग पत्र देने एवं उसके स्वीकार हो जाने पर.
  • चारित्रिक दोष होने पर और, कार्यकारिणी समिति के निर्णय अनुसार संस्था से निकाल दिये जाने पर (जिसके निर्णय पारित होने की सूचना सदस्य को लिखित में देना होगी).

12. सभाएं (साधारण, प्रबंधकारिणी एवं विशेष)

(अ) साधारण सभा

साधारण सभा में नियम 6 में दर्शाए श्रेणी के सदस्य समावेशित होंगे। साधारण सभा की बैठक आवश्यकतानुार होगी, पंरतु वर्ष में बैठक एक बार अनिर्वाय होगी। बैठक की माह, तारीख तथा बैठक का स्थान व समय कार्यकारिणी समिति निश्चित करेगी, जिसकी सूचना 15 दिवस पूर्व प्रत्येक सदस्य को दी जावेगी। बैठक का कोरम 3/5 सदस्यों का होगा। संस्था को प्रथम आम सभा पंजीयन दिनांक से तीन माह के भीतर बुलाई जाएगी। उसमें संस्थाओं के पदाधिकारियों का विधिवत निर्वाचन किया जावेगा। यदि संबंधित आम सभा का आयोजन किसी समय नहीं किया जाता तो पंजीयक को अधिकार होगा कि वह संस्था की आमसभा का आयोजन किसी जिम्मेदार कर्मचारी के मार्गदर्शन में करा लें जिसमें पदाधिकारियों का विधिवत चुनाव कराया जावेगा। यदि सभा का कोरम पूर्ण नहीं होता तो सभा स्थगित कर इसी स्थान पर पुन: की जावेगी, जिसके लिए कोरम की आवश्यकता नहीं होगी.

(ब) प्रबंधकारिणी सभा

प्रबंधकारिणी सभा की बैठक प्रत्येक 3 माह में होगी तथा बैठक का एजेण्डा तथा सूचना बैठक दिनांक से सात दिन पूर्व कार्यकारिणी के प्रत्येक सदस्य को भेजी जानी आवश्यक होगी। बैठक का कोरम 1/2 सदस्यों का होगा। यदि बैठक का कोरम पूर्ण नहीं होता है, तो बैठक एक घण्टे के लिए स्थागित कर उसी स्थान पर पुनः की जावेगी,जिसके लिए कोरम की कोई शर्त नही होगी.

(स) विशेष सभा

यदि कम से कम कुल संख्या (कुल सदस्यों की संख्या) के 2/3 सदस्यों द्वारा लिखित रूप से बैठक बुलाने हेतु आवेदन करे, तो उनके दर्शाये विषय पर विचार करने के लिए साधारण सभा की बैठक बुलाई जावेगी। विशेष संकल्प पारित होने पर संकल्प की प्रति, पंजीयक को संकल्प पारित हो जाने के दिनांक से 14 दिन के भीतर भेजी जावेगी। पंजीयक को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करने तथा समिति को परामर्श देने का अधिकार होगा.

साधारण सभा के अधिकार एवं कर्तव्य:

  • (क) संस्था के पिछले वर्ष का वार्षिक विवरण, प्रगति प्रतिवेदन स्वीकृत करना।
  • (ख) समाज की सामाजिक, शेक्षणिक आर्थिक, राजनेतिक स्थिति पर विचार करना.
  • (ग) समाज के विकास हेतु कार्यक्रम प्रस्तुत करना.
  • (घ) संस्था की स्थाई निधि व संपत्ति की ठीक व्यवस्था करना।
  • (ड) आगामी वर्ष के लिए लेखा परीक्षकों की नियुक्ति करना।
  • (छ) अन्य ऐसे विषयों पर विचार करना जो प्रबंधकारिणी द्वारा प्रस्तुत हों।
  • (ज) संस्था द्वारा संचालित संस्थाओं के आय व्यय पत्रकों को स्वीकृत करना।

प्रबंधकारिणी का गठन एवं पदाधिकारियों के अधिकार

प्रबंध समिति का कार्यकाल: समस्त स्तरीय प्रबंध समिति का कार्यकाल 3 वर्ष होगा। यथेष्ट कारण होने पर उस समय तक कार्य करती रहेगी जब तक नई समिति का निर्माण न हो जाए (अधिकतम 6 माह विस्तार, साधारण सभा का अनुमोदन अनिवार्य).

(क) राज्य की प्रबंधकारिणी का गठन (संशोधित स्वरूप):

स.क्र. पद का नाम निर्धारित संख्या (अधिकतम)
1अध्यक्ष01
2उपाध्यक्ष02
3महासचिव08
4सचिव08
5संयुक्त सचिव08
6कोषाध्यक्ष01
7आडिटर01
8प्रवक्ता01
9सदस्य (प्रत्येक जिले से एक)52

(ख) संभागीय एवं जिला/तहसील कार्यकारिणी ढांचा:

  • संभागीय कार्यकारिणी: नियुक्तियां प्रांताध्यक्ष/प्रांतीय प्रबंध कार्यकारिणी द्वारा की जावेगी या निर्वाचन से तय होगी। संभाग स्तर की संख्या जिला स्तरीय कार्यकारिणी संख्या के बराबर होगी.
  • जिला स्तरीय कार्यकारिणी संख्या: अध्यक्ष-01, उपाध्यक्ष-2, महासचिव-08, सचिव-08, संयुक्त सचिव-08, कोषाध्यक्ष-01, आडिटर-01, प्रवक्ता-01, सदस्य-48.
  • तहसील /विकासखण्ड स्तरीय कार्यकारिणी संख्या: अध्यक्ष-01, उपाध्यक्ष-2, महासचिव-08, सचिव-08, संयुक्त सचिव-08, कोषाध्यक्ष-01, आडिटर-01, प्रवक्ता-01, सदस्य-48.
  • विभागीय समितियां एवं प्रकोष्ठ: प्रांतीय, संभाग और जिला स्तर पर सफाई नगरीय कर्मचारी, चिकित्सा, अभियंता, राजस्व, महिला, वाणिज्यिक कर आदि प्रकोष्ठों का गठन प्रांताध्यक्ष की अनुमति से मनोनयन/पर्यवेक्षक द्वारा निर्वाचन से होगा.

पदाधिकारियों के विशिष्ट अधिकार एवं कर्तव्य:

  • अध्यक्ष: समस्त बैठकों की अध्यक्षता करना; विचारार्थ विषयों में निर्णायक मत (Casting Vote) देना; पदाधिकारियों के बीच कार्य एवं क्षेत्र का विभाजन करना.
  • उपाध्यक्ष: अध्यक्ष की अनुपस्थिति में बैठकों की अध्यक्षता व अधिकृत मामलों में अध्यक्ष के अधिकारों का उपयोग करना.
  • महासचिव: प्रांतीय अध्यक्ष के निर्देशानुसार बैठकें बुलाना, आवेदन/सुझाव प्रस्तुत करना, आय-व्यय लेखा तैयार कर प्रस्तुत करना। महासचिव को एक समय में रू. 20,000/- तक व्यय करने का अधिकार होगा.
  • सचिव व संयुक्त सचिव: अध्यक्ष द्वारा सौंपे गए महासचिव के कर्तव्यों व अन्य उत्तरदायित्वों का निर्वाह करना.
  • कोषाध्यक्ष: संस्था की धनराशि का पूर्ण हिसाब रखना तथा अध्यक्ष, महासचिव या कार्यकारिणी द्वारा स्वीकृत व्यय करना। दैनिक व्यय हेतु पास में अधिकतम रू. 5000/- रख सकते हैं.
  • आडिटर: संस्था के आय-व्यय का ऑडिट करना.

वित्तीय नियम, संपत्ति एवं वैधानिक व्यवस्थाएं

10. सदस्यता शुल्क का वितरण (संशोधित नियम):

जिला शाखा से प्राप्त सदस्यता शुल्क की पूर्ण राशि 100 प्रतिशत प्रांतीय कार्यालय में जमा रहेगी। प्रांतीय कार्यालय द्वारा उपर्युक्त राशि में से यथासंभव आवश्यकतानुसार राशि जिला निर्वाचन अधिकारी (अजाक्स) को निर्वाचन एवं उससे जुड़े अन्य खर्चो की पूर्ति हेतु प्रदाय की जाएगी। प्रांतीय कार्यालय के द्वारा उपर्युक्तनुसार शेष बची राशि का 40 प्रतिशत जिला शाखा के कार्यालयों की पूर्ति हेतु उनके बैंक खाते में निर्वाचन/ मनोनीत जिलाध्यक्ष को प्रदाय की जाएगी, जिसमें से 10 प्रतिशत तहसील एवं ब्लाक को उपलब्ध कराई जाएगी, 10 प्रतिशत संभाग को दी जावेगी एवं शेष 50 प्रतिशत प्रदेश में जमा रहेगी. जिला शाखा उपरोक्तनुसार प्रादेशिक कार्यालय से प्राप्त राशि में से आवश्यकतानुसार राशि तहसील स्तरीय शाखाओं को संचालन व उनके कार्यकलाप हेतु प्रदान करेगी।

कार्यालय अभिलेख (पंजी व्यवस्था):

संस्था कार्यालय में सदस्य पंजी रखी जायेगी तथा उसमें निम्न ब्यौरे दर्ज किये जायेगें:

  • प्रत्येक सदस्य का नाम, पता तथा विभाग का नाम.
  • वह तारीख जिसको सदस्यों को प्रवेश दिया गया तथा रसीद नंबर.
  • वह तारीख जिससे सदस्यता समाप्त हुई हो.

बैंक खाता संचालन एवं वित्तीय सीमाएं:

  • संस्था की समस्त निधि किसी राष्ट्रीयकृत बैंक, सहकारी बैंक या पोस्ट ऑफिस में सुरक्षित रखी जाएगी.
  • धन का आहरण (Withdrawal) अध्यक्ष या मंत्री तथा कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षरों से ही संभव होगा.

पंजीयक (Registrar) को भेजी जाने वाली जानकारियां व अधिकार:

  • धारा 27 व 28: वार्षिक सभा होने के 14 दिन के भीतर कार्यकारिणी समिति की सूची फाइल की जाएगी एवं परीक्षित लेखा भेजा जाएगा.
  • संशोधन (धारा 26): विधान में संशोधन साधारण सभा में उपस्थित सदस्यों के 2/3 मतों से पारित होगा। पंजीयक को भी संस्था हित में संशोधन का अधिकार होगा.
  • विघटन (धारा 27): संस्था का विघटन साधारण सभा के कुल सदस्यों के 3/5 मत से ही किया जा सकेगा.
  • सम्पत्ति नियम (धारा 28): संस्था की चल/अचल सम्पत्ति संस्था के नाम रहेगी। अचल सम्पत्ति रजिस्ट्रार फर्म्स सोसायटीज की लिखित अनुज्ञा के बिना दान, विक्रय या अंतरित नहीं की जा सकेगी.
  • विवाद (धारा 30): विवाद की स्थिति में अध्यक्ष साधारण सभा की अनुमति से सुलझाएंगे। असंतोष होने पर मामला रजिस्ट्रार को भेजा जाएगा, जिनका निर्णय अंतिम एवं सर्वमान्य होगा.

आचरण संहिता एवं आदर्श चुनाव आचार संहिता

अजाक्स आचरण संहिता (बिन्दु क्रमांक 07):

प्रत्येक सदस्य को अनुशासित रहते हुए संघ का कार्य करना है जिससे बाहरी वातावरण में संगठन की छवि धूमिल न हो बल्कि अपनी समस्याओं को शांति व भाईचारा में रहकर अनुशासित ढ़ंग से प्रस्तुत करनी है। संघ के विरूद्ध सदस्यों द्वारा अनुशासनात्मक तरीके से पेश न आने पर प्राथमिक सदस्यता से निष्काषित करने का अधिकार प्रांताध्यक्ष को होगा.

धारा-32: आदर्श चुनाव आचार संहिता

जिला, तहसील व ब्लाक स्तरीय निवार्चन प्रक्रियाओं के अतिरिक्त विभिन्न विभागीय शाखाओं व विभिन्न प्रकोष्ठ के निवार्चन प्रक्रियाओं को स्वस्थ एवं पारदर्शी बनाये रखने के लिए निम्नानुसार आदर्श आचार संहिता स्थायी रूप से लागू की जाती है:-

  • अध्यक्षों व अन्य पदों पर अभ्यर्थियों के निवार्चन प्रक्रिया में भाग लेने हेतु संघ की प्राथमिक सदस्यता अनिवार्य होगी।
  • अन्य मान्यता प्राप्त संघों को इस निवार्चन प्रक्रिया में भाग लेने की पात्रता नहीं होगी।
  • प्रांतीय कार्यालय को प्राप्त सदस्यता सूची का अनुमोदन प्रांतीय अध्यक्ष अथवा उनके निर्देशानुसार महासचिव करेंगे। समस्याओं के निराकरण हेतु 05 सदस्यीय समिति गठित होगी, जो अंतिम प्रतिवेदन प्रांताध्यक्ष को देगी.
  • मतपेटी व्यवस्था: मतदान स्थल पर प्रति 500 सदस्यों पर 1 मतपेटी रखी जावेगी। महिलाओं के लिए पृथक से मतपेटी होगी।
  • निवार्चन वर्ष में अभ्यर्थी आवेदन प्रस्तुत करने वाले सदस्य का संबंधित जिले की मतदाता सूची में नाम होना अनिवार्य है।
05. मतदाता सूची प्रारूप तालिका:
स. क्र. जारी रसीद क्रमांक सदस्यता क्रमांक नाम पिता का नाम पद पुरुष/महिला कार्यरत विभाग/कार्यालय नाम व पता
1 2 3 4 5 6 7 8

नोट: इसके अतिरिक्त सी.डी. (CD) में भी मतदाता सूची प्रांतीय कार्यालय को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।

निर्वाचन नामांकन शुल्क तालिका (पदवार राशि):
क्रमांक पद का नाम पद संख्या शुल्क राशि (रू.)
1अध्यक्ष (जिला, तहसील व ब्लाक)11000
2उपाध्यक्ष2500
3महासचिव8500
4सचिव8500
5संयुक्त सचिव8500
6कोषाध्यक्ष1500
7ऑडिटर1500
8कार्यकारिणी सदस्य40100

महत्वपूर्ण न्यूनतम सदस्य लक्ष्य नियम: प्रत्येक जिले में निर्धारित न्यूनतम सदस्य बनाना अनिवार्य है। भोपाल जिले के लिए न्यूनतम 3000, संभाग स्तर के जिलों (इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, सागर, ग्वालियर, रीवा, शहडोल, होशंगाबाद एवं मुरैना) के लिए 3000 एवं शेष जिलों के लिए 1200 सदस्य संख्या निर्धारित है। केन्द्र सरकार के कर्मचारी संघ में सदस्यता ग्रहण कर सकते है, लेकिन पदाधिकारी नहीं बन सकते है।